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फिर दशहरा की खुशी देश पे छाने आई - रमेश कँवल

2025 की ग़ज़लें

Translation

#ग़ज़ल2025@रमेश ‘कँवल’49
फिर दशहरा की ख़ुशी देश पे छाने आई
है सनातन ये वतन सबको बताने आई
प्रेम सौन्दर्य के आकाश पे तारे दमके
दीप ख़ुशहाली के धरती भी सजाने आई
जब जलाने को निकल आए सभी रावण को
माँ भवानी की कृपा साथ निभाने आई
शौर्य दिखने लगा भारत का जगत में लोगो
जब से मोदी की धमक राह दिखाने आई
लोग योगी की हुकूमत की करेंगे कीर्तन
सारे अवरोध सनातन के हटाने आई
शंख बजने लगे मंदिर में हुई पूजा भी
टीम जब अपनी विदेशी को हराने आई
मैं हुआ हैराँ 'कँवल' देख के उस आभा को
चाँदनी रात में जो बाल सुखाने आई
सृजन - 30 सितंबर, 2025
फ़ाइलातुन फ़इलातुन फ़इलातुन फ़ेलुन