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पूछ लीजे न इस ज़माने से - रमेश 'कँवल'

2025 की ग़ज़लें

Translation

#ग़ज़ल2025@रमेश ‘कँवल’47
पूछ लीजे न इस ज़माने से
क्या मिला हमको दिल लगाने से
लोग हैरत से तक रहे हैं हमें
बाद मुद्दत के मुस्कुराने से
आशियाने में छा गई रौनक़
एक बच्चे के घर में आने से
चाँद तारों की खुल गई क़िस्मत
एक सूरज के डूब जाने से
जिन गवाहों को मिल गये पैसे
वो मुकर बैठे सच बताने से
अदलो-इंसाफ़ का मज़ाक़ बना
आज रिश्वत चलन में आने से
फूल खुशियों के खिल गए दिल में
मेरे दिलबर के मुस्कुराने से
रूठ जाने का उनके क्या मतलब
मान जायेंगे जब मनाने से
जब तवज्जो रही न महफ़िल में
उठ गये हम किसी बहाने से
अपनी तारीफ़ उनके मुंह पे ‘कँवल’
बाज़ आए कहाँ सुनाने से
सृजन - 13 जुलाई,2025
फ़ाइलातुन मफ़ाइलुन फ़ेलुन