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धूप में जिस्म कम जलाया कर - रमेश 'कँवल'

2025 की ग़ज़लें

Translation

#ग़ज़ल2025@रमेश ‘कँवल’45
धूप में जिस्म कम जलाया कर
बारिशें हों तो छत पे आया कर
अपनी यादों से गुदगुदाया कर
मेरी ग़ज़लों को गुनगुनाया कर
मुश्किलों में न आजमाया कर
हौसला मेरा तू बढ़ाया कर
जो भी आदाब है निभाया कर
महफिलों में न खिलखिलाया कर
देश-हित को न भूल जाया कर
घर के भेदी पे क़हर ढाया कर
आँख की रोशनी बढ़ाया कर
रोज़ शबनम पे चल के आया कर
रूठना हो तो हठ दिखाया कर
पर मनाऊँ जो मान जाया कर
पास जा कर किसी से मांग 'कँवल'
दिल भी ब्लिंकिट से मत मंगाया कर
सृजन - 23-09-2025
फ़ाइलातुन मफ़ाइलुन फ़ेलुन