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दिल के रुतबे में कमी अच्छी नहीं

2025 की ग़ज़लें

Translation

#ग़ज़ल2025@रमेश ‘कँवल’43
दिल के रुतबे में कमी अच्छी नहीं
रुख़ पे ये शर्मिंदगी अच्छी नहीं
ख़ूबसूरत हौसलों के शहर में
ये उदासी की गली अच्छी नहीं
जब हो लेना सख्त कोई फ़ैसला
भावनाओं की नदी अच्छी नहीं
जब बिछड़ने का हो मौसम रूबरू
आँखों में बेबस नमी अच्छी नहीं
रूठ जाता है तवाज़ुन दोस्तो
बेवफ़ाई यार की अच्छी नहीं
प्यार से मनुहार से भी बात हो
हर घड़ी ये बरहमी अच्छी नहीं
रौशनी अच्छी बहुत है चैन की
उलझनों की तीरगी अच्छी नहीं
जब सितम की हद हुई दिल ने कहा
यार की दिलकश गली अच्छी नहीं
हर हसीं चेहरे की चाहत क्यों भला
दिल की ये आवारगी अच्छी नहीं
अपने दम पर जब हो हासिल, मरहबा
नाम शुहरत मांगे की अच्छी नहीं
मुफ़्लिसों से दिल्लगी हो जब 'कँवल'
अहले-ज़र की शायरी अच्छी नहीं
सृजन - 31 मार्च,2025
फ़ाइलातुन फ़ाइलातुन फ़ाइलुन
facebook – 1-4-2025
दो बातें,जहानाबाद 22 जून,2025 में प्रकाशित