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तुम तो ऊला पुर मआनी हो गये

2025 की ग़ज़लें

Translation

#ग़ज़ल2025@रमेश ‘कँवल’39
तुम तो ऊला पुर मआनी हो गये
बे मज़ा हम मिसरा सानी हो गये
वहम था हम जावेदानी हो गये
कैसे कैसे लोग फ़ानी हो गये
ज़ो'म में कितने थे अपने तर्क पर
जब मिले वे पानी पानी हो गए
लज़्ज़ते- फ़ुरक़त का दम घुटने लगा
वस्ल की जब हम कहानी हो गए
पढ़ के सोशल मीडिया के मंच पर
कैसे कैसे लोग ज्ञानी हो गये
वक़्फ़ पर है शोरगुल बेजा बहुत
जो चलन में कल थे फ़ानी हो गये
जिनसे मिल कर होते थे हम ख़ुश बहुत
वो बलाए -आसमानी हो गये
दौरे-नौ ने छीन ली सब रौनक़ें
बस्ती के बस्ती पुरानी हो गये
जब हुए वो राह के पत्थर 'कँवल'
हम भी दरिया की रवानी हो गये
सृजन 7 मार्च,2025
फ़ाइलातुन फ़ाइलातुन फ़ाइलुन