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ज़िन्दगी जीने की जसारत हो

2025 की ग़ज़लें

Translation

#ग़ज़ल2025@रमेश ‘कँवल’33
ज़िन्दगी जीने की जसारत हो
मुश्किलों में हँसूँ ये आदत हो
साथ गर आपकी मुहब्बत हो
कोई भी दिन हो ख़ूबसूरत हो
मैं निपट लूंगा हर मुसीबत से
आपको मुझ पे गर अक़ीदत हो
हौसला जब बुलंद हो दिल का
ग़ैर मुमकिन है ख़स्ता हालत हो
काश ! मुफ़लिस को अद्ल मिल पाए
ऐसी इस देश की अदालत हो
वक़्फ़ पर है तजाद का आलम
कोई सूरत नहीं कि राहत हो
मिल गई है रदीफ़ 'हो' कल शब
क़ाफ़िया है 'कँवल' 'शराफ़त' हो
सृजन : 15 अप्रैल, 2025
फ़ाइलातुन मफ़ाइलुन फ़ेलुन
इंदौर से प्रकाशित पत्रिका 'हस्ताक्षर' के मई,2025 अंक में प्रकाशित