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जब उसूलों की रहबरी होगी - रमेश 'कँवल'

2025 की ग़ज़लें

Translation

#ग़ज़ल2025@रमेश ‘कँवल’31
जब उसूलों की रहबरी होगी
देश में हर तरफ़ खुशी होगी
चाँद के दिल में बेकली होगी
मस्त दफ्तर में चाँदनी होगी
तीरगी है हमारी बस्ती में
उनकी महफ़िल में रोशनी होगी
दिल बुझा होगा सख्त काँटों का
गुल के होंठों पे ताज़गी होगी
लोग होंगे धनी- अमीर सभी
अब वतन में न मुफलिसी होगी
अजनबी होंगे राहबर बनकर
अपने लोगों में बेरुखी होगी
यूं ही कहिए 'कँवल' हसीं ग़ज़लें
मस्त लहज़े की शायरी होगी
सृजन : 2 जून, 2025
फ़ाइलातुन मफ़ाइलुन फ़ेलुन