#ग़ज़ल2025@रमेश ‘कँवल’30
ग़लतफ़हमी की तीली ने जलाया
किसी अफ़वाह ने सब कुछ मिटाया
सितारे रक़्स में बेसुध पड़े थे
दिवाकर ने उन्हें रस्ता दिखाया
सभी बह्शी जुटे इस्कान मंदिर
सभी ने स्नेह का दीपक बुझाया
घरों में बेटियों की आबरू भी
न बच पायी ये कैसा वक़्त आया
भरा था ज़हर उनके ज़ह्नो- दिल में
बज़ाहिर जिनकी थी संदल सी काया
ये दिल इक अर्दली बन बैठा लोगो
मेरे क़ातिल के पीछे पीछे आया
हवा पानी प्रदूषित हो गई है
'कॅंवल' को बूढ़े पीपल ने बताया
सृजन : 15-12-2024
मफ़ाईलुन मफ़ाईलुन फ़ऊलुन