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कहाँ तक जियें हम वफ़ा करते करते-रमेश 'कँवल'

2025 की ग़ज़लें

Translation

#ग़ज़ल2025@रमेश ‘कँवल’26
कहाँ तक जियें हम वफ़ा करते करते
वो थकते कहाँ हैं दग़ा करते करते
दुआ आप की काम मेरे न आई
शफ़ा मिल न पाई दवा करते करते
पहलगाम शामिल है फ़ितरत में उनकी
न दहशत से माने मना करते करते
निरंतर हमें कष्ट देते रहे हैं
बने निर्दयी वो दया करते करते
भलाई की बातें सुनाते रहे पर
नहीं बाज़ आए बुरा करते करते s
निकल तो गए हम तुझे ढूँढने पर
हुए लापता खुद पता करते करते
कँवल कारोबारे- मुहब्बत में हमने
खसारा उठाया नफ़ा करते करते
सृजन 28-04-2025
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