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उसका ग़म उसका है उल्लास हमारा क्या है - रमेश 'कँवल'

2025 की ग़ज़लें

Translation

#ग़ज़ल2025@रमेश ‘कँवल’23
उसका ग़म उसका है उल्लास हमारा क्या है
सब को ये हो गया अहसास हमारा क्या है
जो नहा लेता है संगम में कोई भी उसको
मोक्ष मिलने का है विश्वास हमारा क्या है
कुम्भ में आस्था संगम पे नहाने पहुंची
बन गया विश्व में इतिहास हमारा क्या है
क्रैज़ भगवा का चढ़ा ऐसा कि मशहूर हुआ
हर्षिता, ममता का सन्यास हमारा क्या है
पास के मुल्कों में होता है निरंतर हमला
अब सनातन पे है संत्रास हमारा क्या है
देह को नित नए पकवान ज़रूरी तो नहीं
उसके हित में करो उपवास हमारा क्या है
अपने माँ-बाप पे अश्लील सा टीका करना
है नई पीढ़ी का परिहास हमारा क्या है
राहबर अपना उठाता है क़दम जन हित में
देश को हो गया आभास हमारा क्या है
शायरी आपकी रंग लाएगी इक रोज 'कँवल'
आप करते रहें अभ्यास हमारा क्या है
सृजन - 11 फ़रवरी, 2025
फ़ाइलातुन फ़इलातुन फ़इलातुन फ़ेलुन
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