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उसके होंठों पे ताज़गी है अभी - 'रमेश 'कँवल'

2025 की ग़ज़लें

Translation

#ग़ज़ल2025@रमेश ‘कँवल’24
उसकी हर बात मदभरी है अभी
उसके चेहरे पे सादगी है अभी
बूँद शबनम की पा गई है अभी
उसके होंठों पे ताज़गी है अभी
उसकी बातों से रस टपकता है
उसके लहजे में साहिरी है अभी
नींद आँखों से दूर है शायद
उसके कमरे में रोशनी है अभी
उसके लब पंखुड़ी गुलाब के हैं
और आरिज़ भी शबनमी है अभी
लोच टहनी सी उस बदन में है
उसके साये में रोशनी है अभी
कौन क़िस्सा बयां करे उसका
उसकी चितवन में शायरी है अभी
मेरी खुशियों की झील सूख गई
उसकी फ़ुरक़त में बेकसी है अभी
बात क्या मैं 'कँवल' करूँ उसकी
जिसकी रानाई फूल सी है अभी
सृजन - 17 मार्च,2025
फ़ाइलातुन मफ़ाइलुन फ़इलुन / फ़ेलुन
कोलकाता से प्रकाशित सदीनामा के 26 मार्च,2025 अंक में प्रकाशित
दो बातें,जहानाबाद के 1 जून, 2025 में प्रकाशित
facebook पर 2 जून,2025 को पोस्टेड