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आप से जब मन मिला है - रमेश 'कँवल'

2025 की ग़ज़लें

Translation

#ग़ज़ल2025@रमेश ‘कँवल’15
आप से जब मन मिला है
मिट गया हर इक गिला है
चाहतों का सिलसिला है
फूल यौवन का खिला है
गोपियां यूं खुश हैं जैसे
उन को ही मोहन मिला है
ध्वंस हो पाएगा कैसे
ये सनातन का क़िला है
राष्ट्रहित में कार्यरत कुछ
रहबरों का क़ाफ़िला है
सदियों के उत्सर्ग का फल
राम मंदिर का सिला है
हैं 'कँवल' कुछ दुष्ट जिनसे
दुश्मनों को बल मिला है
सृजन : 23 फ़रवरी,2024
फ़ाइलातुन फ़ाइलातुन
जी. एस. के. शिष्ट विनोद, दानापुर,पटना अंक 46 पृष्ठ 23 पर प्रकाशित