#ग़ज़ल2025@रमेश ‘कँवल’12
आप जब साथ साथ चलते हैं
दीप खुशियों के खूब जलते हैं
ग़म के मौसम को ये बदलते हैं
"हौसले मुश्किलों में पलते हैं"
डायबीटिज़ का रोग है जिनको
सुब्ह या शाम को टहलते हैं
शह्र की मंडियों की हैं रौनक
गाँव के पेड़ों पर जो फलते हैं
जह्न के दर पे देते हैं दस्तक
दिल के अरमान जब मचलते हैं
शौक़ से लुत्फ़ लीजे फूलों का
बेसबब इनको क्यों मसलते हैं
उलझनों के उतार कर कपड़े
हम 'कँवल' सुख के साथ चलते हैं
सृजन: 16 जून, 2025
फ़ाइलातुन मफ़ाइलुन फ़ेलुन
फ़ेस बुक पर 13 सितंबर,2025 को पोस्टेड