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आइए बैठिए- रमेश कँवल

2025 की ग़ज़लें

Translation

#ग़ज़ल2025@रमेश ‘कँवल’10
आइए बैठिए
मुस्कुरा दीजिए
सोचते हैं बहुत
कुछ हमें बोलिए
फ़िक्र किस बात की
फ़िक्र मत कीजिए
यार की याद में
रात भर रो लिए
काशी मथुरा के दिन
आ गए आइए
राम मंदिर बना
गर्व कुछ कीजिए
दर्प का आईना
तोड़ भी दीजिए
देश सर्वोपरि
देशहित सोचिए
सब है मुमकिन 'कँवल'
हौसला कीजिए
सृजन 22 अप्रैल,2024
फ़ाइलुन फ़ाइलुन
जी. एस. के. शिष्ट विनोद अंक 46 पृष्ठ 23 पर प्रकाशित