Translation
#ग़ज़ल2025@रमेश ‘कँवल’02
अपनापन स्वीकार करो
अपनों जैसा प्यार करो
सब अपने बन जाएंगे
खुशियों की बौछार करो
अम्न का दीप स्तंभ दिखे
वैसा कुछ उपचार करो
लाल क़िला से बोलो जब
न्योछावर उपहार करो
सीमित कर लो ज़रूरत को
ख़ुशियों पर अधिकार करो
सबको जुम्मे की छुट्टी
ठीक नहीं, इनकार करो
बांग्लादेशी वहशत सा
दहशत मत तैयार करो
जंतर-मंतर पर बैठो
शंभू बार्डर पार करो
देवों सा आभामंडल
तुम भी 'कँवल' साकार करो