#ग़ज़ल2025@रमेश ‘कँवल’01
अना का अपनी सौदा क्यों करें हम
न हो लज़्ज़त तो शिकवा क्यों करें हम
रिफ़ाक़त का नहीं जिनका इरादा
भला उन पर भरोसा क्यों करें हम
हर इक पल जो बुलंदी सोचता है
उसी रहबर को रुसवा क्यों करें हम
हमारे देश का हित सबसे ऊपर
बताओ फिर ख़सारा क्यों करें हम
गगनचुंबी इमारत चार सू हैं
ग़रीबी है ये दावा क्यों करें हम
ख़ला में भी वतन का दबदबा है
क़यादत से किनारा क्यों करें हम
अमीरों की गुज़ारिश है 'कँवल' से
फ़क़ीरी में गुज़ारा क्यों करें हम
सृजन -2 सितंबर,2025
मफ़ाईलुन मफ़ाईलुन फ़ऊलुन
फ़ेसबुक पर 2 सितंबर, 2025 को पोस्टेड